
काशीपुर। ट्रेड यूनियन एक्टू से सम्बद्ध उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की ब्लाॅक कमेटी की बैठक में कार्यकत्रियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग जोर शोर से उठाई गई।
सोमवार को ब्लॉक परिसर में हुई बैठक को सम्बोधित करते हुए यूनियन की राज्य उपाध्यक्ष रीता कश्यप ने कहा यूनियन 2011 से आशा वर्कर्स के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है। यूनियन की प्रमुख मांग है कि आशा वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। आशा वर्कर्स स्वास्थय विभाग के हर छोटे-बड़े काम करती हैं। हर नया फील्ड वर्क व सर्वे आशाओं को ही सरकार द्वारा सौंप दिया जाता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के बाहर के काम भी आशाओं को सौंप दिए जाते हैं। शासन-प्रशासन द्वारा सरकार के जनविरोधी कानून यूसीसी के तहत शादियों के रजिस्ट्रेशन कराने के काम भी आशाओं को सौंपे जा रहे हैं। प्रत्येक दिन 2 शादियों को रजिस्टर करवाने का काम सरकार जबरदस्ती आशाओं को मात्र 25 रुपए प्रति रजिस्ट्रेशन में सौंप रही हैं। हमारी यूनियन इस मनमानी का सख्त विरोध करती है।

यूनियन की जिला उपसचिव कामरेड अनिता अन्ना ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार ने मजदूरों के पुराने 44 श्रम कानून खत्म करके नये 4 श्रम कोड लागू कर दिए हैं। जिससे मजदूरों के यूनियन बनाने के अधिकार सहित तमाम अधिकारों को खत्म कर दिए जाए। हालांकि अभी तक सरकार ने आशाओं को मजदूर मानना तो दूर, मजदूरी के बराबर वेतन देना भी शुरू नहीं किया है। इन श्रम कानूनों के लागू होने के बाद यूनियन बनाकर लड़ने का अधिकार भी आशाओं से छीन जाएगा।
बैठक में 28 दिसम्बर को हल्द्वानी मे होने वाली राज्य कमेटी की मीटिंग को सफल बनाने का निर्णय लिया गया। जिसमें प्रत्येक ब्लाॅक से दो पदाधिकारी जायेंगे। बैठक में रीता कश्यप, सुधा शर्मा शशि वाला,मधु सुशीला ठाकुर स्नैहलता चौहान, सोनिया,राजबाला, ममता गोस्वामी, कुसुम चौहान, रेनू वर्मा,अंकुर,नसीम,शमा ,परवीन, मंजू चौहान, सुभद्रा, अनीता कश्यप, मोनिका, सुषमा देवी, नसीम झा, पूनम सक्सेना, वंदना,जगदंबा,लक्ष्मी, मधुबाला, सोनी शर्मा, प्रभा देवी, सुशीला ठाकुर, अर्चना शर्मा, उमा चौहान, ममता अग्रवाल, चित्रा चौहान, मंजू चौहान,आदि मौजूद रहे।


