गन्ना खेती को बढ़ावा देने को गन्ना विकास विभाग ने चलाया जागरूकता अभियान… धान के विकल्प के रूप में गन्ने की फसल अपनाने की अपील

काशीपुर। गन्ना विकास विभाग ने जनपद में ग्रीष्मकालीन धान पर प्रतिबंध के बाद किसानों को लाभकारी विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है। विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को गन्ने की आधुनिक खेती, उन्नत प्रजातियों, सहफसली प्रणाली और सरकारी योजनाओं की जानकारी दे रही हैं। अभियान का मुख्य संदेश “धान के स्थान पर गन्ने की फसल उगाना है, मृदा सुधार कर भावी पीढ़ी को बचाना है।
सहायक गन्ना आयुक्त शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि गन्ना एक प्रमुख नकदी फसल है, जो कृषकों की आय का स्थायी स्रोत बन सकती है। अन्य फसलों की तुलना में गन्ना द्विवार्षिक होने के कारण इसकी लागत अपेक्षाकृत कम आती है, जबकि उत्पादन और लाभ अधिक प्राप्त होता है। साथ ही दैवीय आपदाओं से नुकसान की आशंका भी कम रहती है। उन्होंने किसानों को गन्ने के साथ अंतःफसल (इंटरक्रॉपिंग) अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। विभाग का नारा “गन्ने के साथ अन्तः फसल लगायेंगे, फसल की लागत कम करके दोहरा लाभ कमायेंगे” किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्य गन्ना अधिकारी डॉ. राजीव कुमार के अनुसार गन्ने के साथ दलहन, तिलहन अथवा सब्जियों की खेती कर किसान एक ही खेत से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गन्ने का अब तक का अधिकतम मूल्य 405 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों को बेहतर पारिश्रमिक सुनिश्चित हो रहा है। चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति हेतु सहकारी गन्ना विकास समितियां सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और किसानों को पंजीकरण, आपूर्ति एवं भुगतान संबंधी सभी सुविधाएं प्रदान कर रही हैं। किराये अथवा ठेके पर खेती करने वाले कृषकों को भी सप्लायर सदस्य के रूप में गन्ना आपूर्ति की सुविधा उपलब्ध है तथा प‌ट्टेदार/किरायेदार को गन्ना मूल्य का सीधा भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। जबकि ज्येष्ठ गन्ना विकास अधिकारी बीके चौधरी ने बताया भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ तथा प्रदेश के अन्य शोध केंद्रों के सहयोग से शीघ्र पकने वाली नवीनतम गन्ना प्रजातियों का गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। ताकि जनपद में गन्ना उत्पादन और किसानों की आय दोनों में वृद्धि हो सके। अधिकारियों ने गांवों में किसानों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और आधुनिक तकनीक अपनाकर अधिक उत्पादन प्राप्त करने का आह्वान किया। गन्ना समिति के सुपरवाइजर अनवर सैफी ने बताया कि विभागीय अधिकारी गांव गांव जाकर किसानों को गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए जागरूक कर रहे हैं।

  • आरडी खान

    आरडी खान

    प्रधान संपादक 8077326105

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    काशीपुर। ट्रेड यूनियन ऐक्टू से सम्बद्ध उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की जसपुर ब्लॉक कमेटी की बैठक हुई। बैठक में 12 फरवरी को ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत अखिल भारतीय आम हड़ताल में पूरी ताकत से शामिल होने और रुद्रपुर में जिलास्तरीय प्रदर्शन में शामिल होने का निर्णय लिया।

    बैठक को संबोधित करते हुए यूनियन की जिला उपसचिव अनीता अन्ना ने कहा कि चार श्रम कोड वापस लेने, आशाओं को न्यूनतम वेतन 35000 हजार करने, आशा वर्कर्स कोे राज्य कर्मचारी का दर्जा व न्यनूतम वेतन देने, रिटायरमेंट के समय पेंशन, अस्पताल में सम्मानजनक व्यवहार, ट्रेनिंग स्वास्थ्य विभाग स्वयं कराए और एनजीओ का हस्तक्षेप बंद करने, ट्रेनिंग का प्रतिदिन न्यूनतम 500 रूपये भुगतान करने, सभी बकाया राशि का भुगतान करने, हर माह का पैसा हर माह खाते में डालने सहित अन्य मांगों को लेकर ट्रेड यूनियन ऐक्टू के नेतृत्व आशा वर्कर्स रुद्रपुर में प्रदर्शन करेंगी।
    उन्होंने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार आशा वर्कर्स को न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा नहीं देकर उनका आर्थिक शोषण कर रही है. जिस सरकार का काम अपने कर्मचारियों की शोषण से रक्षा का होना चाहिए वही उनका शोषण करे इससे अफसोसजनक बात और क्या होगी? भाजपा सरकार के राज में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बजट भी लगातार कम किया जा रहा है जिससे आशाओं का शोषण और भी ज्यादा बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि हड़ताल के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा खटीमा में आशा यूनियन से डीजी हेल्थ के प्रस्ताव को लागू करने के वादे को अमली जामा पहनाने की मांग भी की जायेगी. आशाओं को नियमित वेतन,पक्की नौकरी और सम्मान से कम कुछ भी मंजूर नहीं।
    बैठक को संबोधित करते हुए ब्लॉक अध्यक्ष सुधा शर्मा ने कहा कि आशा वर्कर्स की हालत सभी उत्पीड़ित श्रमिकों में सबसे ज्यादा खराब है. उन्हें तो श्रमिक का दर्जा भी नही दिया जाता, बंधुवा मजदूर की तरह काम लिया जाता है. आशा वर्कर्स पर सरकार नए नए काम का बोझ लगातार बढ़ाते जा रही है. शिशु मृत्यु दर कम करने में आशा वर्कर्स का बहुत बड़ा योगदान है, गर्भवती महिलाओं की देख-रेख के लिए आशाओं को आधी रात में भी बिना किसी विभागीय सहायता के दौड़ना पड़ता है. इसके बावजूद आशा वर्कर्स को वेतन देने के नाम पर सिर्फ नाममात्र की प्रोत्साहन राशि और कुछ योजनाओं का कमीशन दिया जाता है. यह खुला शोषण कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
    बैठक में ब्लॉक अध्यक्ष सुधा शर्मा, ब्लॉक सचिव सोनिया,सरिता सक्सेना, प्रेमा, सुनीता विशोई, शशिवाला,मधुबाला, ममता अग्रवाल, गुड्डन शर्मा, अलका चौहान, सुशीला ठाकुर, भागीरथी, संतोष, पुष्पा, आशा सचदेवा, मोनिका, सरस्वती पांडे, नूतन चौहान, लक्ष्मी, सुशीला टम्टा, चित्रा चौहान, ममता देवी, शजवाला आदि मौजूद थे।

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