क्या गुड़िया जैसी धाक बरकरार रख पाएंगे दीपक बाली??. वर्चस्व की राजनीति के चक्रव्यूह को कैसे तोड़ेंगे महापौर


आरडी खान
काशीपुर। काशीपुर की राजनीति के पुरोधा रहे सत्येंद्र चंद्र गुड़िया चार दशक तक निर्विवाद और एकछत्र नेता रहे। किसी में भी इतनी जुर्रत नहीं थी कि उनके किसी भी कथन का प्रतिवाद कर सके। चुनाव जीतने के बाद महापौर दीपक बाली भी उसी रौं में दिख रहे हैं। लेकिन उनका वर्चस्व पार्टी के दूसरे नेता सहन नहीं कर पा रहे है। चार माह के अंतराल में ही बाली उनके निशाने पर आ गए हैं।
पूर्व सांसद सत्येंद्र चंद्र गुड़िया का अपने दौर में यूपी और उत्तराखंड की राजनीति में जबरदस्त जलवा था। यह उनकी शख्शियत ही थी कि देरी से आने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री तक को सार्वजनिक रूप से उनके कोप का शिकार होना पड़ा था। व्यवहार में उनका वचन अकाट्य था। सीएम पुष्कर सिंह धामी से अति निकटता के चलते महापौर दीपक बाली भी स्व. गुड़िया की कार्यशैली की झलक देखी जा रही है। बाली के प्रभाव से अफसर उनकी दहलीज पर भी ड्यूटी बजा रहे हैं। उनका हर हुकूम अधिकारियों के सर माथे है। ताबड़तोड़ एक्शन से बाली को छाया सीएम तक कहा जाने लगा है। चर्चा है कि सीएम धामी ने काशीपुर की सीट अपने लिए लॉक कर दी है। फील्ड तैयार करने के लिए बाली को विकास कार्य कराने की खुली छूट दे दी है। बाली अपने संबंधों के बूते सीएम से करोड़ों रुपए की योजनाएं काशीपुर के लिए ले चुके है। काशीपुर सीट पर नो एंट्री के बोर्ड से मौजूदा विधायक समेत अन्य दावेदारों में बैचेनी है। शुरुवाती चार महीनों में नई दुल्हन की तरह भाजपा नेताओं ने महापौर बाली का खूब स्वागत सत्कार किया। लेकिन अब बाली की अति सक्रियता उन्हें खलने लगी है। पार्टी के नेता विकास के मुद्दे पर भले ही बाली का विरोध नहीं कर पा रहे हो, लेकिन नीतिगत फैसलों को लेकर उनका विरोध शुरू हो गया है। वर्चस्व की लड़ाई में राजनीति का समीकरण मेयर चुनाव से पूर्व का बनने लगा है। बाली पर संगठन को भरोसे में न लेने की तोहमत लगाकर नेता उन्हें घेरने में जुट गए है। ऐसे नेताओं का कहना है कि दीपक बाली आरएसएस की पृष्ठ भूमि से न होने के कारण संगठन की रीति नीति से वाकिफ नहीं है। जबकि सरकार के साथ ही संगठन से भी रिश्ते बेहतर होना जरूरी है। जबकि बाली का कहना है कि वो वृहद हित में काम करते है। व्यक्तिगत हितों को वो ज्यादा तरजीह नहीं देते।
एक बात तो साफ है कि अगर पार्टी के भीतर महापौर दीपक बाली का विरोध तेज होता है तो इससे गुटबाजी बढ़ेगी। ऐसे में काशीपुर सीट से सीएम धामी के चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर ग्रहण लग सकता है।

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