
काशीपुर। हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में कवि एवं साहित्यकार विनोद भगत का खासा योगदान है। उनका कहानी संग्रह दरकते सपने इसी माह प्रकाशित हो रहा है।
मूल रूप से भीमताल निवासी साहित्यकार विनोद भगत यहां कुर्मांचल कॉलोनी में रहते हैं। उनके माता-पिता सरकारी शिक्षक थे। भगत का रुझान शुरू से ही हिंदी साहित्य में रहा। भगत की कहानियां व कविताएं देश की कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। 2013 में उनका पहला काव्य संग्रह ‘पेट की आग’ प्रकाशित हुआ। इस संग्रह में उनकी कविताओं को काफी सराहा गया। उनकी रचनाएं चाहें कविताएं हों या कहानियां आम जनमानस के जीवन की जद्दोजहद पर आधारित होती हैं। उनकी ज्यादातर रचनाएं हिंदी में ही हैं।

हालांकि कुमाऊंनी भाषा में भी उन्होंने साहित्य सृजन किया है। ‘बारिश की एक बूंद’ नाम से उनका दूसरा काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ था। पहाड़ से युवाओं के पलायन पर एक लघु उपन्यास ‘दरकते सपने’ भी हैं। जिसमें 24 कहानियां हैं। फेरीवाला पत्रकार,मौन संत और मुखर सत्ता, श्रद्धा बनाम सेवा, पलायन की टीस, रिश्तों में दरार लाती राजनीति जैसी कहानियां आज के समाज की हकीकत को सामने लाने का हिंदी भाषा और कुमाऊंनी में लिखे गए इस उपन्यास के प्रकाशन से पूर्व ही इसका आरंभिक अंश सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहा। एक अकेली युवती के अभिशापित जीवन पर आधारित उनकी कहानी ‘एक और गुलाबो’ खूब चर्चित रही और पाठकों की ओर से सराही गई। अब उनका कहानी संग्रह दरकते सपने प्रकाशित हो रहा है। जिसमें 24 कहानियां आपको पढ़ने को मिलेगी। काव्य संग्रह फेरीवाला पत्रकार,मौन संत और मुखर सत्ता, श्रद्धा बनाम सेवा, पलायन की टीस, रिश्तों में दरार लाती राजनीति जैसी कहानियां आज के समाज की हकीकत को सामने लाने का सार्थक प्रयास है।


